अर्जुन कपूर अभिनेता भले ही कैसे हों, लेकिन वे एक बेहद संवेदनशील शख़्स है इसे सब जानते हैं. अपनी हंसी और दर्द को कभी दार्शनिक अंदाज़ में तो कभी प्रतीकात्मक रूप में वे जताते रहे हैं.सोशल मीडिया के अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उन्होंने तमाम तस्वीरों व वीडियो के ज़रिए जहां अपनी पिछले तीन महीने का लेखा-जोखा साझा किया, वहीं ख़ुशी-ग़म को बयां करने में भी नहीं हिचके.उनके मुस्कुराते चेहरे के पीछे के दर्द को शायद ही कोई समझ पाता हो, फिर चाहे वो अपने हो, दोस्त-क़रीबी ही क्यों न हो. मुस्कुराहट में खालीपन का और अकेलेपन का ग़म परछाइयां बन उनके साथ-साथ चलता रहता है.दर्द को बांटने के लिए वे न जाने कितनी कोशिशों से गुज़रते हैं- कभी आइसक्रीम व डिलिशियस फूड साथी बन जाते हैं, तो कभी पेट डॉगी और वर्कआउट बहुत बड़ी राहत दे जाते हैं. अपनी फिल्म ‘मेरी बीवी की शादी’ के प्रेस कॉन्फ्रेंस से लेकर डांस रिहर्सल, घिबली लुक तक में भी दिल बहलाने के प्रयास किए जाते हैं. कभी दार्शनिक अंदाज़ में एम. वेडेनबेनर के कोट्स को भी हाइलाइट करके अपनी मनोस्थिति से रू-ब-रू कराने की जद्दोज़ेहद होती है उनकी. वेडेनबेनर का कथन- ख़ासतौर पर मुश्किल दिनों में, जब मुझे यक़ीन होता है कि मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा, तब मैं ख़ुद को याद दिलाना पसंद करता हूं कि बुरे दिनों से निपटने का मेरा ट्रैक रिकॉर्ड अब तक 100% है, और यह बहुत अच्छा है. इसके ज़रिए अर्जुन यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि माना इन दिनों वे बड़ी मुश्किल घड़ी से गुज़र रहे हैं. लेकिन इसके पहले भी इसस बदतर स्थितियों को उन्होंने झेला है. संघर्ष भी बदस्तूर रहा, लेकिन वे सब को पार करते हुए उबरकर न केवल ख़ुद को संभाला, बल्कि कठिन समय में पिता-बहनों का भी सहारा बने. इसलिए यह व़क्त भी सहजता से गुज़र जाएगा, ऐसा उनका विश्वास है.
तस्वीरें भी हमारा हाल-ए-दिल बयां कर ही देती हैं, बस यह सामने वाले पर निर्भर है कि वो कितना कुछ समझ पाता है. इन दिनों अर्जुन अपने नाम के अनुकूल एक अलग ही महाभारत की लड़ाई कहें या संघर्ष कर रहे हैं. कुछ दिल का मामला है, तो कुछ हालात ने मारा है... लेकिन यही तो ज़िंदगी की ख़ूबसूरती कहे या फ़लसफ़ा है कि कभी किसी को मुक़म्मल जहां नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आस्मां नहीं मिलता... जब दर्द हद से गुज़रने लगता है, तब अक्सर कलाकार सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं. कभी अपना दर्द बांटने तो कभी मुखौटा ओढ़े हुए दुनिया को बताने के लिए कि आज जो भी है जैसा भी है हम ख़ुश हैं. प्यार में दिल टूटा तो है, परंतु अब कुछ संभले हैं अर्जुन और करियर पर नए सिरे से फोकस कर रहे हैं. ‘सिंघम अगेन’ में विलेन के रूप में भी उनकी सराहना हुई. अब तो उनके पास नायक-खलनायक दोनों ही तरह के रोल्स के ऑप्शन हैं, ऑल द बेस्ट. जीवन को एक नया ख़ूबसूरत मोड़ दें और यह तो वे भी बख़ूबी जानते हैं कि अपनी मर्ज़ी से कहां अपने सफ़र के हम हैं रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं...










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