शादी से पहले के सुहाने सपने, वो स़फेद घोड़े वाला राजकुमार और परी जैसे राजकुमारी ढूंढ़ने पर हमें मिल जाती है. फिर हम रिश्ता तय होते ही उसके साथ एक हसीन सफ़र की कल्पना करते-करते बहुत आगे निकल जाते हैं. लेकिन आंख खुलती है शादी के बाद की हक़ीक़त में, जहां न कोई महल होता है, न कोई राजकुमार और ना ही कोई राजकुमारी.
शादी के बाद की रियलिटी शादी के पहले के सपनों की हक़ीक़त को साफ़ बयां कर देती है. शादी से पहले कपल्स की जो एक्सपेक्टेशन होती हैं, वो शादी के बाद फिट नहीं बैठतीं. दोनों के ही ज़िंदगी जीने के तरी़के शादी के बाद बहुत हद तक बदल जाते हैं. चैलेंज का एक नया सेट आपका इंतज़ार कर रहा होता है. आइए जानें कुछ ऐसी ही रियलिटी के बारे में, जो शादी के बाद चेंज हो जाती हैं.

लॉन्ग ड्राइव इवनिंग वॉक बन जाती है
शादी से पहले अक्सर अपने पार्टनर के साथ लॉन्ग ड्राइव पर जाना बहुत पसंद आता था. लेकिन शादी के बाद वो आफ़त नज़र आता है, क्योंकि अगले दिन ऑफिस जाना है, मेड ने भी आना है, आंख ना खुली तो कहीं दूधवाला न चला जाए... इन सब बातों की टेंशन लॉन्ग ड्राइव पर जाने की इज़ाज़त ही नहीं देती. इसलिए अब इवनिंग वॉक से काम चलाना पड़ता है. वहीं जहां पहले साथ होने पर रोमांटिक बातें होती थीं, वही रोमांटिक बातें अब घर और ज़िम्मेदारियों में आकर अटक जाती हैं.
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पार्टनर की ख़ूबियां अब कमियों में बदल जाती हैं
पहले पार्टनर का बचपना देख दिल उस पर फ़िदा हो जाता था. उसकी शरारतों पर प्यार आता था. अब उसकी यही हरकतें बचकाना लगती हैं. पार्टनर का पहले बात-बात पर रोमांटिक होना दिल जीत लेता था, वही अब छिछोरापन लगने लगता है. पहले यूं ही शॉपिंग करना अच्छा लगता था, पर शादी के बाद वही फ़िजूलख़र्च लगने लगता है. पहले पार्टनर का दोस्तों के साथ घूमना, नाइट आउट करना कूल लगता था, वही अब टाइम वेस्ट और बेकार की अय्याशी करना लगता है.
फ़िजूलख़र्ची बचत में बदल जाती है
कल तक जहां आप बिना सोचे-समझे कुछ भी शॉपिंग कर लेती थीं. मम्मी-पापा के लाख समझाने पर भी सेल के नाम पर दस चीज़ें एक्स्ट्रा ख़रीद लेती थीं. अब कोई रोकने वाला नहीं है, लेकिन फिर भी जितनी ज़रूरत हो, उतना ही ख़रीद पाती हैं, क्योंकि हर महीने कुछ बचत भी करनी है. ये फीलिंग बिना किसी के बताए ख़ुद-ब-ख़ुद मन में आ जाती है. शादी के बाद आप पैसे को हाथ के मैल की तरह जहां-तहां ख़र्च नहीं कर सकते हैं, क्योंकि अपना परिवार शुरू करने के लिए एक बड़ा घर लेने की आवश्यकता होगी, शायद एक कार ख़रीदनी होगी. अच्छा लाइफस्टाइल भी बनाना है. इन सबके लिए पैसे तो जोड़ने ही पड़ेंगे.

फ्राइडे नाइट मीन्स किचन शॉपिंग
एक बात जिसके बारे में आपको कभी कोई नहीं बताएगा, वह यह है कि शादी के बाद अब हर फ्राइडे लेट नाइट पार्टीज़ नहीं होती हैं, बल्कि ज़्यादातर ग्रॉसरी शॉपिंग की जाती है. इस रियलिटी को एक्सेप्ट करना वाकई मुश्किल होगा कि अब आप हाई हील्स पहन कर रेस्टोरेंट में डिनर नहीं कर रही हैं, बल्कि सब्ज़ी वाले से मोलभाव कर रही हैं.
सेक्स अब घर की मुर्गी दाल बराबर
लोगों को लगता है शादी का मतलब हर रोज़ सेक्स करने की फ्रीडम. लेकिन ऐसा नहीं है, बल्कि शादी के बाद घर और रोज़मर्रा के काम के चलते कई-कई दिन तक सेक्स नहीं हो पाता. कपल्स अपनी बाकी ज़िम्मेदारियों को पूरी करते-करते थक जाते हैं और उन्हें लगता है कि कोई बात नहीं, कल कर लेंगे, परसों कर लेंगे. अब तो घर की ही बात है.
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सैटरडे नाइट की मूवी डेट, होम नेटफ्लिक्स मूवी में बदल जाती है
दरअसल, कई लोगों को ऐसा लगता है कि शादी से पहले हमारे बीच जो चीज़ें होती थीं, वे शादी के बाद भी वैसी ही रहेंगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है. ऐसा ही कुछ मूवी डेट्स के साथ भी है. साथ में फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने वाले कपल्स का प्लान शादी के बाद नेटफ्लिक्स या हॉट स्टार जैसे जढढ प्लेटफॉर्म्स के साथ एक्सचेंज हो जाता है. बाहर जाकर मूवी देखने की बजाय अब वो घर पर ही मूवी देखना पसंद करते हैं. अगर बाहर चले भी गए, तो पहले मूवी के दौरान पॉपकॉर्न खाने का अपना ही अलग मज़ा था, लेकिन शादी के बाद लगता है क्या इतने पैसे पॉपकॉर्न में लगाने. इतने में तो डिनर ही हो जाएगा, वरना घर जाकर कौन खाना बनाएं.
बैचलर लाइफ की आज़ादी ज़िम्मेदारियों में बदल जाती है
शादी के बाद ज़िम्मेदारियां बढ़ जाती हैं. करियर, घर-परिवार आदि सब कुछ संभालना होता है. आप उतना समय अपने दोस्तों को नहीं दे पाते, जितना पहले देते थे. शादी के बाद फोकस घर-परिवार और साथी पर हो जाता है. घर का कुछ ना कुछ काम ऐसा अटक जाता है कि आपको कई बार फ्रेंड्स के साथ मिलने के प्रोग्राम तक कैंसिल करने पड़ते हैं. दरअसल, बैचलर्स अक्सर नाइट आउट पर जाना पसंद करते हैं. वो पूरी आज़ादी से घूमते-फिरते हैं और अपने दोस्तों के साथ मस्ती करते हैं. लेकिन शादी के बाद उनको अपने इस सुख का त्याग करना पड़ता है. अपने लाइफ पार्टनर को समय देना उनकी प्राथमिकताओं में जुड़ जाता है.
लाइफ की प्रिऑरिटीज़ चेंज हो जाती है
शादी के बाद प्रिऑरिटीज़ चेंज हो जाती हैं. जहां पहले दोस्त, ऑफिस से बढ़कर कुछ नहीं था. उनके एक फोन कॉल पर सब छोड़कर चले जाते थे. वहीं अब पार्टनर और घर प्रिऑरिटीज़ बन जाते हैं. उनसे बढ़कर कुछ नहीं होता. दोस्त भी सेकंडरी हो जाते हैं.
मैं की जगह हम कहना सीख जाते हैं
जब आपकी शादी हो चुकी होती है तो आपका कोई भी निर्णय बस आपका नहीं रहता. आप केवल अपने बारे में सोचना छोड़ देते हैं. जहां शादी के पहले आपको कुछ भी करने की पूरी आज़ादी होती है, वहीं शादी के बाद ऐसा नहीं रह जाता. हर बात में अब आप स़िर्फ अपना नहीं सोचते, बल्कि अपने पार्टनर की राय को भी महत्व देते हैं. यानी आप मैं की जगह हम कहना सीख जाते हैं.
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कहीं गुम हो गई वो सेक्सी फिगर
जिस सेक्सी फिगर का पूरा कॉलेज दीवाना हुआ करता था, यहां तक कि बड़ी बहन तक जला करती थी, वो फिगर तो जाने कहां चला गया. अब कहां जिम और एक्सरसाइज़ का टाइम मिलता है. ये बदलाव स़िर्फ लड़कियों में ही नहीं आता, बल्कि लड़कों की भी तोंद निकल आती है. दोनों ही अपनी फिगर को लेकर बेफ़िक्रे हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है अब किसी के कमेंट की ज़रूरत नहीं है. अब हमें किसे दिखाना है अपना परफेक्ट फिगर और बॉडी.
कुछ बातों की शर्मिंदगी अब नार्मल रूटीन में आ जाती है
पहले जब पार्टनर से मिलने जाते थे और गैस पास हो जाए तो शर्मिंदगी होती थी. इसी तरह बिना नहाए ब्रेकफास्ट कर लेना, ब्रश के बिना चाय पी लेना... इन सब बातों को हम छिपाते थे, वे अब नॉर्मल हो गए हैं और डेली रूटीन का हिस्सा बन गए हैं.
प्राइवेसी की बैंड बज जाती है
जहां कल तक आप अपने घरवालों को अपनी प्राइवेसी को लेकर बड़े-बड़े लेक्चर देती थीं कि चाहे जो हो जाए मैं अपना रूम, बुआ हो या कोई भी मेहमान किसी के साथ शेयर नहीं करूंगी. वहीं अब आपका बिस्तर, आपका कमरा- हर चीज़ में अब दो लोग होंगे. आप अपने मन से अपने रूम को फैला भी नहीं पाएंगी, क्योंकि अब वह रूम स़िर्फ आपका नहीं है, बल्कि किसी के साथ शेयरिंग में हैं आप.
- शिखा जैन

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