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कहानी- ज़िंदगी मौत ना बने (Short Story- Zindagi Maut Na Bane)

आजकल सुशांत को वीडियो कॉलिंग पर बात करने का मन नहीं करता. कहीं रिनि दुखी न हो जाए, पर्ण को तकलीफ़ न हो, इसलिए कैमरे के सामने बिना किसी ग़लती के अभिनय करना पड़ता है. कभी-कभी ज़बरदस्ती पर्ण को पैसे भेजता है. नए कपड़े खरीदकर रिश्तेदारों और दोस्तों को बताता है, "यह पर्ण ने मुझे दिया है."

रात साढ़े ग्यारह बज चुके हैं, लेकिन सुशांत का सेशन अभी भी खत्म नहीं हुआ है. बाहर चारों ओर घुप्प अंधेरा है. चांद काले बादलों की घनी परत से ढका हुआ है. सुशांत शाम से बालकनी में बैठा हुआ है. एक सिगरेट का पैकेट खाली हो चुका है और दूसरा आधा खाली हो गया है. शराब की बोतल आधे से ज़्यादा खाली हो चुकी है. रिनी कमरे में सो रही है, उसने नींद की गोली खा ली है. सुशांत की आंखों से नींद गायब है. आज उसकी सारी मेहनत और कोशिशें बेकार हो गई हैं.

बचपन में कुमिल्ला से कोलकाता भागकर आना पड़ा. पिता की बचत और संपत्ति सब दंगे के कारण पानी की तरह बह गई. दक्षिण कोलकाता मे यादवपुर के इस इलाके में आकर पिता ने कपड़े की दुकान में लेखा-जोखा का काम शुरू किया. बहुत कठिनाई से दिन गुज़रते थे.

एक भाई, एक बहन, मां और पिता के साथ छोटा सा परिवार था. मां एक ब्रेड फैक्ट्री में काम करने जाती थीं. उनका काम ब्रेड के पैकेट पर मोम की परत चढ़ाना था. गर्मी के दिनों में फैक्ट्री की आग की गर्मी मां के शरीर की सारा उर्जा ख़त्म कर देती थी. रात में मां को रसोई में नहीं जाने देते थे, इसलिए भाई-बहन मिलकर रात का खाना बनाते थे. बचपन में सीखा हुआ खाना बनाने का हुनर आज भी सुशांत के काम आता है. रसोई में जाकर उसने अंडे का ऑमलेट और चीज़ स्प्रेड के साथ चार सैंडविच बनाए. पेट में शराब पड़ने से भूख बढ़ गई है. रिनी को अभी जगाना नहीं है.

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दोपहर में ब्रिस्टल से सुपर्ण के दोस्त सुमन का फोन आया था, जिसके बाद से सुशांत मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गया है. सुपर्ण अस्पताल में है, गहरे अवसाद में है, उसका इलाज चल रहा है. सुशांत का सजाया हुआ बगीचा बिखर गया है. सुशांत हमेशा से ही परिवार प्रेमी रहा है. परिवार पर किसी तरह का आंच नहीं आने देता था. एक तरफ़ अपने करियर को बनाने में माहिर था, तो दूसरी तरफ़ परिवार की देखभाल करता था. जीवन की इस सफल प्रोग्रामिंग ने सुशांत को सामाजिक मापदंडों में 'द कम्प्लीट मैन' का खिताब दिला दिया. सुशांत ने इस बात का आनंद लिया. बचपन में इस चीज़ की कमी महसूस होती थी. मां-पिता दिन-रात मेहनत करते थे. भाई-बहन पढ़ाई और काम में अच्छे थे, लेकिन आर्थिक कमज़ोरी के कारण सामाजिक सम्मान नहीं मिलता था.

कुछ दिन पहले सुपर्ण और कैरल भारत आए थे. उनकी शादी का जश्न मनाने के लिए सुशांत ने बड़ी पार्टी दी थी. सबको दिखाकर कहा था कि सुपर्ण ने एक अंग्रेज़ लड़की नहीं, बल्कि एक सुंदर लड़की से शादी की है. रिनी देखने में सुंदर है, लेकिन सुपर्ण बिल्कुल पिता की तरह दिखता है. पिता की तरह नहीं, बल्कि पिता से भी एक कदम आगे. बड़े घर की लड़की रिनी को प्यार के बंधन में बांधकर सुशांत ने दोस्तों को दिखाया था, "देखो मेरे कैलिबर को." उस दिन पार्टी में भी सबको दिखाया, ख़ासकर ससुरालवालों को. रिनी के घरवालों को सुशांत से शादी कराने का बिल्कुल मन नहीं था. सुशांत छोटी जात का था, घर की स्थिति अच्छी नहीं थी और उसके चेहरे पर कोई चमक नहीं थी. वह कांटा अभी भी मन में चुभता है. उस दिन सबको दिखाकर कहा था, "कैरल जैसी सुंदर लड़की कोई नहीं देखता." मन में कहा था, "इसका मतलब सबको समझ में आ गया होगा." सबको दिखाकर सुपर्ण को पास खींचकर कैरल से कहा था, "यह मेरा पर्ण है. सिर्फ़ मेरा.".

सुंदर कैरल ने सुपर्ण को अपने पास खींच कर होंठों पर किस करके कहा, "नहीं, पर्ण मेरा है. मेरा दिल, मेरी ज़िंदगी. सिर्फ़ मेरा." उस दिन सुशांत ख़ुशी से झूम उठा था. आज वह सबको पीछे छोड़कर काफ़ी आगे निकल चुका है.

बचपन से सुशांत और रिनी ने पर्ण को बहुत लाड़-प्यार से पाला है. क्लास आठ तक सुशांत ने पर्ण को सभी विषय ख़ुद पढ़ाए. आजकल के सिलेबस में अंग्रेज़ी व्याकरण में कुछ ख़ास नहीं है, इसलिए अच्छी अंग्रेज़ी सीखने के लिए सिलेबस से बाहर जाकर पढ़ना पड़ता है. पर्ण के लिए रेन मार्टिन और पीके दे सरकार की अंग्रेजी व्याकरण की किताबें खरीदकर पढ़ाई. पति और पत्नी दोनों का ध्यान पर्ण पर था. पर्ण को सबसे अच्छा बनाना था. इसके लिए जीवन में बहुत त्याग करना पड़ा. दोस्तों के साथ आउटिंग या पिकनिक पर नहीं जाते थे. यहां तक कि रिश्तेदारों से भी संपर्क कम कर दिया. पर्ण ने भी माता-पिता को निराश नहीं किया. एक बार में जॉइंट क्लियर कर दिया. सुशांत हर कदम पर बेटे को जीवन का पाठ पढ़ाता. कहता, "जीवन में कोई फिक्स्ड थ्योरी नहीं चलती. स्थिति को समझकर चलना होता है. भावुक मत होना. भावुकता हमारे निर्णय के सामने एक अदृश्य पर्दा डाल देती है. जो लोग जीवन में तरक़्क़ी करते हैं, वे बचपन से ही भविष्य का रोडमैप बना लेते हैं."

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अपने चेहरे को लेकर पर्ण हमेशा शर्मिंदा रहता. चेहरे और बुद्धि में पर्ण पूरी तरह से पिता का बेटा था. त्वचा का रंग काला होने के साथ-साथ पूरे शरीर पर बड़े-बड़े बाल थे. कॉलेज में पर्ण के दोस्त उसे 'भालू' कहकर बुलाते थे. पर्ण कॉलेज के दिनों में बहुत शर्मीला था. हॉस्टल में रहने के बावजूद उसकी शर्म दूर नहीं होती थी. घर आने पर वह अपने मोबाइल, लैपटॉप और गिटार में ही व्यस्त रहता.

शारीरिक कुरूपता के कारण पर्ण ख़ुद को सिमेटकर रखता था. एक बार न्यू मार्केट में शॉपिंग करते समय पर्ण की कॉलेज की एक सहेली और उसके परिवार से मुलाक़ात हुई. पर्ण न देखने का नाटक करके भागने लगा, लेकिन लड़की आगे बढ़कर बात करने लगी.

जब पर्ण की इंग्लिश लड़की कैरल से दोस्ती हुई तो सुशांत और रिनी दोनों हैरान रह गए. कैरल सुंदर और स्मार्ट थी. फेसबुक पर पर्ण को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी. पहले पहल मैसेंजर बॉक्स में बातचीत होती थी. फिर व्हाट्सएप पर. कैरल ब्रिस्टल में रहती थी, जो कोलकाता से चार घंटे पीछे है. सुबह ग्यारह बजे पहला गुड मॉर्निंग मैसेज आता था. फिर पूरे दिन चैटिंग और वीडियो कॉलिंग चलती. सुशांत ने कभी किसी विदेशी से बात नहीं की थी. जब पर्ण ने कहा कि वह कैरल से बात कराएगा तो रिनी तो क्या, सुशांत भी बहुत डर गया. क्या वह ब्रिटिश एक्सेंट समझ पाएगा! लेकिन पहली बार बात करने के बाद सारे डर दूर हो गए.

कैरल से बात करके बहुत अच्छा लगा. लड़की बहुत उत्साही और बातूनी थी. सुशांत को डैड कहकर बुलाती थी. सुशांत की कोई बेटी नहीं थी, इसलिए किसी लड़की के मुंह से डैड सुनना नया था. जल्दी ही पूरे परिवार के साथ कैरल का प्यारा रिश्ता बन गया. कैरल ने सुशांत और रिनी के कपड़ों का साइज़ मांगा. फिर विदेश से गिफ्ट आया. सुशांत ने भी बहुत कुछ भेजा.

पर्ण का बी. टेक पूरा हो गया. सुशांत ने कहा, "कहीं नौकरी कर लो. दो साल बाद एमबीए कर लेना." 

पर्ण ने दृढ़ता से कहा, "नहीं पापा, मैं मास्टर्स करूंगा." 

सुशांत ने थोड़ा चिंतित होकर पूछा, "वह कहां करना चाहते हो?"

पर्ण ने जवाब दिया, "ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में, मुझे आंशिक छात्रवृत्ति मिली है. रहने का ख़र्च नहीं लगेगा. जाने का किराया लगेगा. बाकी ख़र्चा चला लूंगा." 

सुशांत ने थोड़ा चिढ़कर कहा, "समझ में नहीं आया, रहने का ख़र्च नहीं लगेगा का मतलब? इसके अलावा ख़र्च भी तो बहुत है." 

कुछ देर रुककर पर्ण ने संकोच के साथ कहा, "मतलब, मैं कैरल के घर रहूंगा. उसने मेरे लिए एक पार्ट टाइम नौकरी भी ढूंढ़ी है." सुशांत को यह बात झटके की तरह लगी. अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ. मन में सोचा, मेरा बेटा उस्ताद बन गया है, बहुत आगे निकल गया है. मेरी चिंता कम हो गई. फिर भी, आश्चर्य जताते हुए बोला, "क्या! विदेश में ऐसे किसी को जाने बिना उसके घर रहोगे! तुम हमारे इकलौते बेटे हो. इतना रिस्क लेना ठीक नहीं है."

तीन दिन तक पर्ण ने पिता से बात नहीं की. पिता को देखकर दूसरी तरफ़ मुड़ जाता. रिनी आ कर सुशांत से बोली, "देखो बेटा बड़ा हो गया है, विदेश जाने का मौक़ा मिला है. जाने दो उसे एक बार. कुछ गड़बड़ लगे तो वापस आ जाएगा. उम्र तो कम है, एक मौक़ा मिला है, जाने दो."

सुशांत ने पर्ण का फ्लाइट टिकट कटवा दिया. उसके खाते में कुछ पाउंड डाल दिए, ताकि पहला झटका सहलाने में मदद मिले. कैरल और उसका भाई एयरपोर्ट पर पर्ण को लेने आए और उसे अपने घर ले गए. रिनी के ज़रिए सुशांत को पता चला कि कैरल की मां तलाक़शुदा है. वह, उसका भाई और मां एक साथ रहते हैं. कैरल फैशन डिज़ाइनर है. एक लड़की के साथ मिलकर गारमेंट बनाने की दुकान चलाती है. कैरल की पढ़ाई ज़्यादा आगे नहीं बढ़ी. कभी-कभी फोन आता है, वे सब ठीक हैं.

छह महीने बाद रात में खाना खाने के बाद रिनी ने सुशांत को पास बिठाकर कहा, "पर्ण ने फोन किया था. कुछ नया हुआ है. तुम शांत मन से सुनो." 

रिनी की बात सुनकर सुशांत समझ नहीं पा रहा था कि क्या होगा. “कैरल प्रेग्नेंट है और पर्ण उससे शादी करेगा. “ पर्ण ने अपनी मां को समझाया, “मां समझा करो, कैरल से शादी करने से करियर में बहुत फ़ायदा होगा. स्टूडेंट वीज़ा में बहुत परेशानी है. कैरल से शादी करने पर ग्रीन कार्ड होल्डर बन जाएगा. यूके में स्थायी रूप से रह सकेंगे, और सरकारी नौकरी भी मिलेगी.”

जल्दी से वीजा-पासपोर्ट बनवाकर सुशांत और रिनि ब्रिस्टल पहुंचे। शादी दे कर, बेटे और बहू को साथ लेकर भारत लौटे। भारत में इस बात का सामाजिक पहलू भी संभालना था। भारत में पंद्रह दिन रहकर पर्ण और कैरल ब्रिस्टल लौट गए। तीन महीने बाद सुशांत और रिनि दादा-दादी बन गए। पोता हुआ है, रंग कैरल की तरह है। पर्ण के करियर की चिंता अब सुशांत को नहीं है। मास्टर्स का काम अब रुक गया है। नौकरी करके पैसा कमाना अब पर्ण के लिए मुख्य हो गया है, यह सुशांत अच्छी तरह समझता है। इस निराशा को जाहिर करके हल्का होने का कोई रास्ता नहीं है। प्रतियोगिता में पीछे रह जाएगा। पर्ण के पिता होने की बात को कुछ लोगों से छुपाकर रखना पड़ा। एक के साथ एक मिलाकर तीन करने वाले लोगों की कमी नहीं है.

आजकल सुशांत को वीडियो कॉलिंग पर बात करने का मन नहीं करता. कहीं रिनि दुखी न हो जाए, पर्ण को तकलीफ़ न हो, इसलिए कैमरे के सामने बिना किसी ग़लती के अभिनय करना पड़ता है. कभी-कभी ज़बरदस्ती पर्ण को पैसे भेजता है. नए कपड़े खरीदकर रिश्तेदारों और दोस्तों को बताता है, "यह पर्ण ने मुझे दिया है."

लेकिन मेहनत से कमाए गए पैसों का सही उपयोग नहीं हो रहा है, इसका जवाब अपने मन को कैसे दें! पर्ण को भी अब थोड़ी शर्म आती है. भारत आने की बात नहीं करता. आने की बात उठने पर कहता है, "तुम लोग आओ." सुशांत समझता है कि पर्ण के लिए इतने पैसे फ्लाइट के किराए में देना अब संभव नहीं है. सुशांत ने टिकट कटवाने की पेशकश की थी, लेकिन पर्ण ने लेने से मना कर दिया. ब्रिस्टल जाकर सुशांत ने समझ लिया कि कैरल के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. कैरल जो दुकान चलाती है, वह एक तरह की दर्जी की दुकान है. सारा काम कैरल और उसकी पार्टनर मिलकर करती हैं.

कुछ दिन पहले रिनी ने ज़बरदस्ती वीडियो कॉलिंग की. पर्ण को देखकर रिनी चौंक गई. यह क्या हालत हो गई है! दुबला-पतला चेहरा, आंखों के नीचे गहरे काले घेरे, बाल बिखरे हुए. पूछने पर पर्ण ने कहा, "काम का दबाव और बेटे पॉल की वजह से रात को ठीक से नींद नहीं आती." 

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फोन पर रिनी गरज उठी, "पर्ण मैं तेरी मां हूं. मुझसे कुछ मत छुपाओ. अगर ख़राब लगे तो सबको लेकर चले आओ." 

सुनकर पर्ण हंस दिया. बोला, "तुम लोग चिंता मत करो. थोड़ा आराम कर लूंगा तो सब ठीक हो जाएगा."

फिर आज पर्ण के कॉलेज के दोस्त सुमन का फोन आया, "आंटी, सुपर्ण को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है. उसकी मानसिक स्थिति बहुत ख़राब है. वह डीप डिप्रेशन में है. ट्रीटमेन्ट चल रहा है. आप लोग चले आओ. नहीं तो उसे ठीक नहीं किया जा सकेगा." 

चिंतित स्वर में रिनी ने पूछा, "कैरल कहां है?" 

सुमन ने कहा, "कैरल ने उसे छोड़ दिया है."

 रिनि ने पूछा, "कैरल कहां गई है? उसके घर?" 

सुमन ने कहा, "नहीं आंटी, वह अब अपने बिज़नेस पार्टनर के साथ रहती है."

 रिनी थोड़ी राहत महसूस करती है. हौसला देकर बोली, "ठीक है, हम आ रहे हैं. ग़ुस्से में दोस्त के घर चली गई है. देखते हैं, जाकर समझा-बुझाकर कुछ कर सकते हैं."

 सुमन हंस पड़ा, बोला, "आंटी, बात इतनी आसान नहीं है. कैरल अपने बिज़नेस पार्टनर से शादी कर रही है. उनका यह रिश्ता बहुत पुराना है." 

रिनी थोड़ी हैरान होकर बोली, "उसका बिज़नेस पार्टनर तो एक लड़की है."

सुमन फिर हंस पड़ा, ख़ुद को संभालकर बोला, "आंटी, यहां यह भी होता है. एक बच्चा पाने के लिए कैरल ने सुपर्ण से शादी की थी. उसने सुपर्ण को अपने मिशन को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया."

रिनी मोबाइल पकड़े नहीं रह सकीं. लाइन काटे बिना ही पास की मेज पर रख दिया. उधर से सुमन की आवाज़ आ रही थी, "आंटी, आंटी, क्या आप मुझे सुन सकती हैं? कैन यू हियर मी? आप लोग जल्दी चले आओ."

सुमित सेनगुप्ता

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