सोशल मीडिया के दौर में जहां एक-दूसरे से कनेक्ट होना हर किसी के लिए बेहद आसान हो गया है तो वहीं विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के दुरुपयोग की कई ख़बरें भी सामने आ चुकी हैं. खासकर, कोरोना काल में फेक ख़बरें और गलत जानकारियां जंगल में आग की तरह सोशल मीडिया पर न सिर्फ फैलाई जा रही हैं, बल्कि इनके ज़रिए आम लोगों को भ्रमित भी किया जा रहा है. आए दिन सोशल मीडिया पर कई ऐसी फेक ख़बरें वायरल होती हैं, जिनसे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है. इसी कड़ी में एक ख़बर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही है, जिसमें दावा किया गया है कि अगले साल यानी 2021 से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की जाएगी यानी उन्हें कम सैलरी दी जाएगी.
बताया जा रहा है कि श्रम कानून में परिवर्तन होने के कारण अगले साल से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी कम हो जाएगी. इस ख़बर के वायरल होने से लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई. इससे पहले कि आप भी इस खबर को सच मानकर इस पर भरोसा कर बैठें, हम आपको बता दें कि प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी पीआईबी फैक्ट चेक ने इस खबर की सच्चाई कुछ और ही बताई है, जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए.
वायरल खबर में दावा- पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर पोस्ट शेयर करते हुए इस वायरल ख़बर की सच्चाई बताई है. पीआईबी फैक्ट चेक में बताया गया है कि एक अखबार की ख़बर में दावा किया जा रहा है कि श्रम कानून में परिवर्तन होने की वजह से अगले साल सरकारी कर्मचारियों की सैलरी कम हो जाएगी.
दावे की हकीकत- पीआईबी फैक्ट चेक ने इस ख़बर को फेक बताते हुए कहा है कि यह दावा बिल्कुल फेक है, क्योंकि वेतन विधेयक 2019 केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू नहीं होगा. इसका मतलब यह है कि अगले साल से सरकारी कर्मचारियों का वेतन नहीं घटेगा.
बता दें कि इस तरह की ख़बरें आए दिन अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आती हैं, जिनकी सच्चाई को लोगों तक पहुंचाने और सत्यता को जांचने के लिए पीआईबी फैक्ट चेक करती है. इसके ज़रिए लोगों तक सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली फेक ख़बरों और गलत जानकारियों की सच्चाई पहुंचाई जाती है.
इसके साथ ही लोगों से लगातार अपील भी की जाती है कि वो सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी ख़बर या जानकारी पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच कर लें और बिना सोचे-समझे इस तरह के संदेशों को फॉरवर्ड या शेयर करने से भी बचें.